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सोना-चांदी की सप्लाई पर संकट के संकेत, DGFT आदेश में देरी से आयात रुका; कीमतों में तेजी के आसार

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देश में सोना और चांदी की सप्लाई पर संकट गहराने लगा है। DGFT के नए आदेश में देरी के कारण बैंकों ने आयात रोक दिया है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ने और स्टॉक की कमी की आशंका बढ़ गई है।

देश में महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर पहले से चल रही चिंताओं के बीच अब सोना और चांदी की सप्लाई को लेकर भी नई स्थिति बनती दिख रही है। ताजा घटनाक्रम में भारतीय बैंकों ने विदेशी सप्लायर्स से कीमती धातुओं के नए आयात ऑर्डर फिलहाल रोक दिए हैं। इसकी वजह सरकार की ओर से जारी होने वाला वह जरूरी आदेश है, जो अभी तक सामने नहीं आ सका है। इस देरी ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है और व्यापारियों से लेकर निवेशकों तक सभी की नजरें अब इस फैसले पर टिकी हैं।सोना और चांदी का आयात सामान्य व्यापारिक वस्तुओं की तरह नहीं होता, बल्कि यह पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहता है। इसके लिए हर वित्त वर्ष की शुरुआत में Directorate General of Foreign Trade (DGFT) की ओर से एक औपचारिक आदेश जारी किया जाता है, जिसमें यह तय किया जाता है कि किन बैंकों और एजेंसियों को आयात की अनुमति दी जाएगी।

मौजूदा स्थिति में समस्या यह है कि पिछला आदेश मार्च 2026 तक ही मान्य था और नए वित्त वर्ष के लिए अब तक ताजा आदेश जारी नहीं हुआ है। यही कारण है कि बैंक नई डील नहीं कर पा रहे हैं और पुराने आयात भी अटक गए हैं। अनिश्चितता के माहौल में बैंकों ने विदेशी सप्लायर्स से नए ऑर्डर लेना फिलहाल बंद कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित होने लगी है।

कस्टम्स में फंसा टनों सोना-चांदी

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, बड़ी मात्रा में सोना और चांदी इस समय देश के विभिन्न कस्टम्स पोर्ट पर अटका हुआ है। अनुमान है कि कई टन सोना और उससे भी अधिक मात्रा में चांदी क्लियरेंस का इंतजार कर रही है। चूंकि इनकी निकासी के लिए DGFT की अनुमति जरूरी होती है, इसलिए बिना आदेश के कस्टम्स विभाग भी आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहा है।

इस स्थिति का सीधा असर बाजार की उपलब्धता पर पड़ रहा है। ज्वेलरी कारोबारियों को समय पर स्टॉक नहीं मिल पा रहा है, जिससे आने वाले समय में दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है और चांदी की खपत के मामले में भी अग्रणी देशों में गिना जाता है। देश में इन धातुओं का उत्पादन बेहद सीमित है, जिसके कारण मांग को पूरा करने के लिए आयात पर भारी निर्भरता रहती है।

ऐसे में आयात रुकने का मतलब है कि घरेलू बाजार में सप्लाई सीमित हो जाएगी। खासतौर पर शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में जब मांग बढ़ती है, तब यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। कारोबारियों को डर है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो बाजार में स्टॉक की कमी देखने को मिल सकती है।

कीमतों में उछाल की संभावना

आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर आयात में यह रुकावट लंबी चलती है, तो सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी आ सकती है। मांग स्थिर या बढ़ती रहने की स्थिति में सप्लाई कम होने से कीमतों पर दबाव बनना स्वाभाविक है।

हालांकि इसका एक सकारात्मक पक्ष भी बताया जा रहा है कि आयात कम होने से देश का व्यापार घाटा कुछ हद तक कम हो सकता है और रुपये पर दबाव घट सकता है। लेकिन आम उपभोक्ता के लिए यह राहत नहीं बल्कि बढ़ती महंगाई का संकेत होगा, क्योंकि उन्हें खरीदारी के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

पहले से कमजोर पड़ी है मांग

गोल्ड सेक्टर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल देश में सोने की मांग में गिरावट दर्ज की गई थी। ऊंची कीमतों और आर्थिक दबाव के कारण लोगों ने खरीदारी सीमित कर दी थी। ऐसे में अब अगर सप्लाई भी प्रभावित होती है, तो बाजार में असंतुलन और बढ़ सकता है।

इस स्थिति में निवेशकों की रणनीति भी बदल सकती है। जहां कुछ लोग कीमत बढ़ने की उम्मीद में निवेश बढ़ा सकते हैं, वहीं आम खरीदार खरीदारी टालने का फैसला कर सकते हैं।

आगे क्या है संभावनाएं

फिलहाल पूरा बाजार DGFT के नए आदेश का इंतजार कर रहा है। जैसे ही यह आदेश जारी होगा, बैंकों को आयात की अनुमति मिल जाएगी और कस्टम्स में फंसा माल भी बाजार में पहुंचने लगेगा। इससे सप्लाई चेन सामान्य हो सकती है और कीमतों पर भी कुछ हद तक नियंत्रण आ सकता है।

लेकिन जब तक यह स्थिति साफ नहीं होती, तब तक बाजार में अनिश्चितता बनी रहने की संभावना है। ज्वेलरी कारोबारियों, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं को आने वाले समय में सतर्क रहना होगा।

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